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mahabharat 13.171.77: चन्द्र, सूर्य, रघु और कुरु के वंश में उत्पन्न सभी राजा प्रतिदिन शुद्ध भक्ति से गायत्री मंत्र का जप करते रहे हैं। गायत्री ही इस संसार के जीवों का परम गति है। 77॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  13.171.77 
सोमादित्यान्वया: सर्वे राघवा: कुरवस्तथा।
पठन्ति शुचयो नित्यं सावित्रीं प्राणिनां गतिम्॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
चन्द्र, सूर्य, रघु और कुरु के वंश में उत्पन्न सभी राजा प्रतिदिन शुद्ध भक्ति से गायत्री मंत्र का जप करते रहे हैं। गायत्री ही इस संसार के जीवों का परम गति है। 77॥
 
All the kings born in the lineage of Chandra, Surya, Raghu and Kuru have been chanting Gayatri Mantra every day with pure devotion. Gayatri is the ultimate destination of the living beings of this world. 77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)