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mahabharat 13.171.74: हे मनुष्यों के स्वामी! सदैव शुद्ध मन से जप करो। यह यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए परम गुप्त मंत्र है। 74.   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  13.171.74 
जपतां जुह्वतां चैव नित्यं च प्रयतात्मनाम्।
ऋषीणां परमं जप्यं गुह्यमेतन्नराधिप॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! सदैव शुद्ध मन से जप करो। यह यज्ञ करने वाले ऋषियों के लिए परम गुप्त मंत्र है। 74.
 
O Lord of men! Always chant with a pure mind. This is the most secret mantra for the sages who perform sacrifices. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)