श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.171.73 
गवां मध्ये तु पठतो गावोऽस्य बहुवत्सला:।
प्रस्थाने वा प्रवासे वा सर्वावस्थां गत: पठेत्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य गायों के बीच बैठकर गायत्री मंत्र का जप करता है, उसके प्रति गायों का प्रेम अनेक गुना बढ़ जाता है। यात्रा करते समय अथवा परदेश में रहते हुए भी इस मंत्र का जप करना चाहिए ॥ 73॥
 
The cows' love for a person who chants the Gayatri Mantra in the midst of them increases manifold. A person should chant it while travelling or in a foreign land. ॥ 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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