Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.72: जो घर परब्रह्मस्वरूप गायत्री मन्त्र के गुणों का कीर्तन सुनते हैं, उस घर के निवासी कभी दुःखी नहीं होते और परम गति को प्राप्त होते हैं ॥72॥ | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तेषां विद्यते दु:खं गच्छन्ति परमां गतिम्।
ये शृण्वन्ति महद् ब्रह्म सावित्रीगुणकीर्तनम्॥ ७२॥
अनुवाद
जो घर परब्रह्मस्वरूप गायत्री मन्त्र के गुणों का कीर्तन सुनते हैं, उस घर के निवासी कभी दुःखी नहीं होते और परम गति को प्राप्त होते हैं ॥72॥
The residents of that house, who listen to the kirtan of the virtues of Gayatri Mantra in the form of Parabrahma, never suffer sorrow and attain the supreme state. 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥