Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.68: जो मनुष्य जहाज या किसी वाहन में यात्रा करते समय, विदेश जाते समय या राज-दरबार जाते समय मन ही मन उत्तम गायत्री मंत्र का जप करता है, वह परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥ 68॥ | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यानपात्रे च याने च प्रवासे राजवेश्मनि।
परां सिद्धिमवाप्नोति सावित्रीं ह्युत्तमां पठन्॥ ६८॥
अनुवाद
जो मनुष्य जहाज या किसी वाहन में यात्रा करते समय, विदेश जाते समय या राज-दरबार जाते समय मन ही मन उत्तम गायत्री मंत्र का जप करता है, वह परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥ 68॥
A person who chants the excellent Gayatri Mantra silently while travelling in a ship or any vehicle, or while going abroad or to the royal court, attains the supreme success. ॥ 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥