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mahabharat 13.171.66: जो मनुष्य धार्मिक यज्ञों और श्राद्धकर्मों के समय उपर्युक्त नामों का पाठ करता है, उसके तर्पण को देवता प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करते हैं और उसके तर्पण को पितर भी प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करते हैं ॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  13.171.66 
एतान् दैवे च पित्र्ये च पठत: पुरुषस्य हि।
भुञ्जते पितर: कव्यं हव्यं च त्रिदिवौकस:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धार्मिक यज्ञों और श्राद्धकर्मों के समय उपर्युक्त नामों का पाठ करता है, उसके तर्पण को देवता प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करते हैं और उसके तर्पण को पितर भी प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करते हैं ॥ 66॥
 
One who recites the above-mentioned names at the time of religious sacrifices and Shraddha ceremonies, his offerings are gladly accepted by the gods and the offerings are gladly accepted by the ancestors. ॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)