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mahabharat 13.171.60: इन देवताओं का प्रतिदिन स्तुतिगान करने से मनुष्य के दुःस्वप्न नष्ट हो जाते हैं, वह सब पापों से मुक्त होकर सकुशल घर लौट आता है ॥60॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.171.60 
एतान् कीर्तयतां नित्यं दु:स्वप्नो नश्यते नृणाम्।
मुच्यते सर्वपापेभ्य: स्वस्तिमांश्च गृहान् व्रजेत्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इन देवताओं का प्रतिदिन स्तुतिगान करने से मनुष्य के दुःस्वप्न नष्ट हो जाते हैं, वह सब पापों से मुक्त होकर सकुशल घर लौट आता है ॥60॥
 
By daily chanting the praises of these deities, a man's nightmares are destroyed. He is freed from all sins and returns home safely. ॥ 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)