Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.6: हे धर्मवेत्ता! जो मनुष्य दिन-रात इस मंत्र का जप करता है, वह कभी पापों से लिप्त नहीं होता। मैं तुम्हें वही मंत्र बता रहा हूँ, इसे एकाग्रचित्त होकर सुनो। | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे धर्मवेत्ता! जो मनुष्य दिन-रात इस मंत्र का जप करता है, वह कभी पापों से लिप्त नहीं होता। मैं तुम्हें वही मंत्र बता रहा हूँ, इसे एकाग्रचित्त होकर सुनो।
O wise man of Dharma! He who chants this mantra day and night is never tainted by sins. I am telling you the same mantra, listen to it with concentration.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥