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mahabharat 13.171.53: वे सभी राजा अग्नि के समान तेजस्वी, अत्यन्त सुन्दर, महान् बलवान, भयंकर शरीर वाले, अत्यन्त धैर्यवान और यश बढ़ाने वाले थे। इन सबका कीर्तन करना चाहिए ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.171.53 
हुताशनसमानेतान् महारूपान् महौजस:।
उग्रकायान् महासत्त्वान् कीर्तयेत् कीर्तिवर्धनान्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वे सभी राजा अग्नि के समान तेजस्वी, अत्यन्त सुन्दर, महान् बलवान, भयंकर शरीर वाले, अत्यन्त धैर्यवान और यश बढ़ाने वाले थे। इन सबका कीर्तन करना चाहिए ॥53॥
 
All those kings were as bright as fire, extremely handsome, endowed with great strength, fierce-bodied, extremely patient and capable of increasing their fame. Kirtan of all these should be done. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)