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mahabharat 13.171.52: उन पराक्रमी राजा श्वेतक और महाराजा भगीरथ का भी स्मरण और कीर्तन करना चाहिए, जिन्होंने गंगाजल छिड़ककर सगर के पुत्रों का उद्धार किया था ॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.171.52 
तथा श्वेतं च राजर्षिं कीर्तयेत् परमद्युतिम्।
सगरस्यात्मजा येन प्लावितास्तारितास्तथा॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उन पराक्रमी राजा श्वेतक और महाराजा भगीरथ का भी स्मरण और कीर्तन करना चाहिए, जिन्होंने गंगाजल छिड़ककर सगर के पुत्रों का उद्धार किया था ॥ 52॥
 
One should also chant and remember the mighty king Svetaka and Maharaja Bhagiratha who saved the sons of Sagara by sprinkling them with the water of the Ganges. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)