Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.50-51: त्रिलोकी के प्रसिद्ध वीर भरत का नाम जपें, जिन्होंने सत्ययुग में गवमय यज्ञ का अनुष्ठान किया था। हम उन विश्वविजयी महाराज रन्तिदेव का भी गुणगान करें, जो तपस्वी, शुभ लक्षणों से युक्त तथा परम तेजस्वी महाराज के रूप में लोगों द्वारा पूजित हैं। | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिलोकी के प्रसिद्ध वीर भरत का नाम जपें, जिन्होंने सत्ययुग में गवमय यज्ञ का अनुष्ठान किया था। हम उन विश्वविजयी महाराज रन्तिदेव का भी गुणगान करें, जो तपस्वी, शुभ लक्षणों से युक्त तथा परम तेजस्वी महाराज के रूप में लोगों द्वारा पूजित हैं।
Recite the name of Bharat, the famous hero of Triloki, who performed the ritual of Gavmay Yagya in Satyayuga. Let us also sing the praises of that world-conquering Maharaj Rantidev, who is blessed with penance, has auspicious traits and is worshiped by the people as the most brilliant Maharaj. 50-51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥