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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  13.171.47-48h 
तथा धर्मार्थकामेषु सिद्धिं च लभते नर:।
पृथुं वैन्यं नृपवरं पृथ्वी यस्याभवत् सुता॥ ४७॥
प्रजापतिं सार्वभौमं कीर्तयेद् वसुधाधिपम्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य उनका नाम लेता है, उसे धर्म, अर्थ और कर्म में सफलता मिलती है। वेणकुमार नृपश्रेष्ठ पृथुका, जिनकी यह पृथ्वी पुत्री थी और जो प्रजापति तथा विश्व सम्राट थे, उनका कीर्तन करना चाहिए। 47 1/2॥
 
The person who takes his name gets success in his religion, wealth and work. Venkumar Nripashrestha Prithuka, whose daughter this earth was and who was Prajapati and the universal emperor, should be chanted. 47 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)