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mahabharat 13.171.36-37: धाद्रेयु, ऋतेयु, कीर्तिमान परिव्याध, एकत, द्वित, त्रित और धर्मात्मा अत्रि के पुत्र सारस्वत मुनि, सूर्य के समान तेजस्वी, ये सातों वरुण के ऋत्विज हैं और इनका निवास पश्चिम दिशा में है। 36-37॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  13.171.36-37 
दृढेयुश्च ऋतेयुश्च परिव्याधश्च कीर्तिमान्।
एकतश्च द्वितश्चैव त्रितश्चादित्यसंनिभा:॥ ३६॥
अत्रे: पुत्रश्च धर्मात्मा ऋषि: सारस्वतस्तथा।
वरुणस्यर्त्विज: सप्त पश्चिमां दिशमाश्रिता:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धाद्रेयु, ऋतेयु, कीर्तिमान परिव्याध, एकत, द्वित, त्रित और धर्मात्मा अत्रि के पुत्र सारस्वत मुनि, सूर्य के समान तेजस्वी, ये सातों वरुण के ऋत्विज हैं और इनका निवास पश्चिम दिशा में है। 36-37॥
 
Dhadreyu, Riteyu, Kirtiman Parivyadha, Ekat, Dwit, Trit and Saraswat Muni, son of Dharmatma Atri, as bright as the sun, these seven are the Ritvijs of Varuna and their residence is in the western direction. 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)