Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.171.34-35: उन्मुचु, प्रमुचु, शक्तिशाली स्वस्त्यत्रेय, दुरथव्य, उर्ध्वबाहु, त्रिनसोमंगिरा और मित्रवरुण के पुत्र महान ऋषि अगस्त्य - ये सात धर्मराज (यम) के ऋत्विज हैं और दक्षिण दिशा में रहते हैं। 34-35॥ | mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्मुचु, प्रमुचु, शक्तिशाली स्वस्त्यत्रेय, दुरथव्य, उर्ध्वबाहु, त्रिनसोमंगिरा और मित्रवरुण के पुत्र महान ऋषि अगस्त्य - ये सात धर्मराज (यम) के ऋत्विज हैं और दक्षिण दिशा में रहते हैं। 34-35॥
Unmuchu, Pramuchu, the powerful Swastyatreya, Durthavya, Urdhvabahu, Trinasomangira and the great sage Agastya, son of Mitravaruna – these seven are the Ritvijas of Dharmaraja (Yama) and reside in the south direction. 34-35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥