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mahabharat 13.171.23: वे सबके प्राणों के स्वामी हैं। जो मनुष्य शुद्ध भाव से प्रतिदिन उनका कीर्तन करता है, उसे धर्म, अर्थ और काम की प्रचुर प्राप्ति होती है। 23॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.171.23 
प्राणानामीश्वरानेतान् कीर्तयन् प्रयतो नर:।
धर्मार्थकामैैर्विपुलैर्युज्यते सह नित्यश:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वे सबके प्राणों के स्वामी हैं। जो मनुष्य शुद्ध भाव से प्रतिदिन उनका कीर्तन करता है, उसे धर्म, अर्थ और काम की प्रचुर प्राप्ति होती है। 23॥
 
He is the master of everyone's life. The person who chants them daily with pure feelings, attains religion, wealth and lust in abundance. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)