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mahabharat 13.171.22: वे अपने दिव्य तेज से प्रजापति ब्रह्माजी द्वारा रचित समस्त लोकों में निवास करते हैं और शुद्ध भाव से सबके कर्मों को देखते हैं ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.171.22 
प्रजापतिकृतानेताँल्लोकान् दिव्येन तेजसा।
वसन्ति सर्वलोकेषु प्रयता: सर्वकर्मसु॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे अपने दिव्य तेज से प्रजापति ब्रह्माजी द्वारा रचित समस्त लोकों में निवास करते हैं और शुद्ध भाव से सबके कर्मों को देखते हैं ॥22॥
 
He resides in all the worlds created by Prajapati Brahmaji with his divine radiance and observes everyone's actions with pure feelings. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)