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mahabharat 13.171.2: यात्रा प्रारंभ करते समय, गृह प्रवेश करते समय या कोई भी कार्य प्रारंभ करते समय, देवयज्ञ में या श्राद्ध के समय किस मंत्र का जप करने से कार्य सिद्ध होता है? 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.171.2 
प्रस्थाने वा प्रवेशे वा प्रवृत्ते वापि कर्मणि।
दैवे वा श्राद्धकाले वा किं जप्यं कर्मसाधनम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
यात्रा प्रारंभ करते समय, गृह प्रवेश करते समय या कोई भी कार्य प्रारंभ करते समय, देवयज्ञ में या श्राद्ध के समय किस मंत्र का जप करने से कार्य सिद्ध होता है? 2॥
 
By chanting which mantra while starting a journey, entering the house or starting any work, in a Devyagya or at the time of Shraddha, the work gets fulfilled? 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)