| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल » श्लोक 14-16h |
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| | | | श्लोक 13.171.14-16h  | शतमेतत् समाम्नातं शतरुद्रे महात्मनाम्।
अंशो भगश्च मित्रश्च वरुणश्च जलेश्वर:॥ १४॥
तथा धातार्यमा चैव जयन्तो भास्करस्तथा।
त्वष्टा पूषा तथैवेन्द्रो द्वादशो विष्णुरुच्यते॥ १५॥
इत्येते द्वादशादित्या: काश्यपेया इति श्रुति:। | | | | | | अनुवाद | | वेद के शतरुद्रिय प्रकरण में महात्मा रुद्र के सैकड़ों नामों का उल्लेख किया गया है। अंश, भग, मित्र, जलेश्वर, वरुण, धाता, अर्यमा, जयन्त, भास्कर, त्वष्टा, पूषा, इन्द्र और विष्णु- ये बारह आदित्य कहलाते हैं। ये सभी कश्यप के पुत्र हैं। 14-15 1/2 | | | | Hundreds of names of Mahatma Rudra have been mentioned in the Shatarudriya episode of the Veda. Ansh, Bhag, Mitra, Jaleshwar, Varun, Dhata, Aryama, Jayant, Bhaskar, Tvashta, Pusha, Indra and Vishnu – these are called twelve Adityas. All of them are sons of Kashyap. 14-15 1/2 | | ✨ ai-generated | | |
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