श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  13.171.10-11 
नमो वसिष्ठाय महाव्रताय
पराशरं वेदनिधिं नमस्ये।
नमोऽस्त्वनन्ताय महोरगाय
नमोऽस्तु सिद्धेभ्य इहाक्षयेभ्य:॥ १०॥
नमोऽस्त्वृषिभ्य: परमं परेषां
देवेषु देवं वरदं वराणाम्।
सहस्रशीर्षाय नम: शिवाय
सहस्रनामाय जनार्दनाय॥ ११॥
 
 
अनुवाद
(यह मंत्र इस प्रकार है -) महाव्रती वशिष्ठ को नमस्कार है, वेदनिधि पराशर को नमस्कार है, विशाल सर्परूपी अनंत (शेषनाग) को नमस्कार है, सनातन सिद्धों को नमस्कार है, ऋषियों को नमस्कार है, वर देने वाले परब्रह्म परमेश्वर को नमस्कार है तथा हजारों सिर वाले भगवान शिव और हजारों नाम धारण करने वाले भगवान जनार्दन को नमस्कार है ॥10-11॥
 
(This mantra is as follows -) Salutations to the great fasting person Vashishtha, salutations to Vedanidhi Parashara, salutations to Anant (Sheshnag) in the form of a huge snake, salutations to the eternal Siddhas, salutations to the Rishis, salutations to the supreme God, the giver of blessings and salutations to Lord Shiva who has thousands of heads and Lord Janardan who bears thousands of names. 10-11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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