श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  13.170.97 
शुभाङ्गो लोकसारङ्ग: सुतन्तुस्तन्तुवर्धन:।
इन्द्रकर्मा महाकर्मा कृतकर्मा कृतागम:॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
782 शुभांग: - जिसके शरीर के अंग सुन्दर हैं, 783 लोकसारंग: - जो लोकों के सार को धारण करता है, 784 सुतन्तु: - जिसका सुन्दर और व्यापक विश्वरूप है, 785 तंतुवर्धन: - जो पूर्वोक्त विश्वतन्त्र को बढ़ाता है, 786 इन्द्रकर्मा - जिसके इन्द्र के समान कर्म हैं, 787 महाकर्मा - जो महान् कर्म करता है, 788 कृतकर्मा - जिसने सम्पूर्ण कर्तव्य कर लिए हैं और जिसका कोई कर्तव्य शेष नहीं है - ऐसा कृतकृत्य, 789 कृतागम: - जो अपनी इच्छा से अनेक कार्यों को पूर्ण करने के लिए अवतार लेता है ॥97॥
 
782 Shubhang: - One who has beautiful body parts, 783 Loksarang: - One who embraces the essence of the worlds, 784 Sutantu: - One who has beautiful and wide world form, 785 Tantuvardhan: - One who increases the aforesaid world fiber, 786 Indrakarma - One who has deeds like Indra, 787 Mahakarma - One who does great deeds, 788 Kritkarma - one who has performed all the duties and has no duty left - such Kritkritya, 789 Kritagam: - one who comes in incarnation to complete many tasks of his own accord. 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)