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mahabharat 13.170.81: 633 अर्चिश्मान् - चन्द्रमा, सूर्य आदि समस्त ज्योतियों को प्रकाशित करने वाली अपार प्रकाशरूपी अनंत किरणों से युक्त, 634 अर्चित्: - ब्रह्मादि, समस्त लोकों द्वारा पूजित, 635 कुम्भ: - कलश के समान सबका निवास, 636 विशुद्धात्मा - परम शुद्ध एवं पवित्र स्वरूप, 637 विशोधन: - स्मरण मात्र से समस्त पापों का नाश करके भक्तों के अन्तःकरण को शुद्ध करने वाले, 638 अनिरुद्ध: - जिन्हें कोई बाँधकर नहीं रख सकता - ऐसे चतुर्व्यूह, हम अनिरुद्धस्वरूप हैं, 639 अप्रतिरथ: - विरोधरहित, 640 प्रद्युम्न: - परम उत्तम चतुर्व्यू, अपार धन से युक्त, हम प्रद्युम्नस्वरूप हैं, 641 अमितविक्रम: - अपार पराक्रमी । 81॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  13.170.81 
अर्चिष्मानर्चित: कुम्भो विशुद्धात्मा विशोधन:।
अनिरुद्धोऽप्रतिरथ: प्रद्युम्नोऽमितविक्रम:॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
633 अर्चिश्मान् - चन्द्रमा, सूर्य आदि समस्त ज्योतियों को प्रकाशित करने वाली अपार प्रकाशरूपी अनंत किरणों से युक्त, 634 अर्चित्: - ब्रह्मादि, समस्त लोकों द्वारा पूजित, 635 कुम्भ: - कलश के समान सबका निवास, 636 विशुद्धात्मा - परम शुद्ध एवं पवित्र स्वरूप, 637 विशोधन: - स्मरण मात्र से समस्त पापों का नाश करके भक्तों के अन्तःकरण को शुद्ध करने वाले, 638 अनिरुद्ध: - जिन्हें कोई बाँधकर नहीं रख सकता - ऐसे चतुर्व्यूह, हम अनिरुद्धस्वरूप हैं, 639 अप्रतिरथ: - विरोधरहित, 640 प्रद्युम्न: - परम उत्तम चतुर्व्यू, अपार धन से युक्त, हम प्रद्युम्नस्वरूप हैं, 641 अमितविक्रम: - अपार पराक्रमी । 81॥
 
633 Archishman - endowed with infinite rays of immense light that make all the lights like moon, sun etc. shine, 634 Archit: - Brahmadi, worshiped by all the worlds, 635 Kumbh: - the abode of all like a pot, 636 Vishuddhatma - supremely pure and pure form of self, 637 Vishodhan: - purify the conscience of the devotees by destroying all the sins just by remembering them. The one who gives, 638 Aniruddha: -Whom no one can bind and keep -such Chaturvyuh, we are in the form of Aniruddha, 639 Apratiratha: -without opposition, 640 Pradyumna: -the supreme best Chaturvyu, full of immense wealth, we are in the form of Pradyumna, 641 Amitvikram: - Immense mighty. 81॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)