435 अनिर्विन्न: - ऊब आदि विकारों से रहित, 436 स्थविष्ठ: - विराट रूप में स्थित, 437 अभू: - अजन्मा, 438 धर्मयूप: - धर्म का आधार, 439 महामख: - महायज्ञ का स्वरूप, 440 नक्षत्रनेमि: - समस्त नक्षत्रों का मध्य रूप, 441 नक्षत्री - चन्द्रमा का रूप, 442 क्षम: - सम्पूर्ण। कार्यों में समर्थ, 443 क्षम: - सम्पूर्ण जगत् का निवास, 444 समिहान: - सृष्टि आदि के लिए उत्तम प्रयास करने वाले । 60॥
435 Anirvinna: -Free from the disorders like boredom, 436 Sthavishtha: -Situated in the form of Virat, 437 Abhu: -Unborn, 438 Dharmayup: -The pillar of religion, 439 Mahamakh: -The form of great sacrifice, 440 Nakshatranemi: -The center form of all the constellations, 441 Nakshatri -The form of the moon, 442 Ksham: -The whole. Capable in works, 443 Kshaam: - the abode of the entire world, 444 Samihan: - those who make good efforts for creation etc. 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥