300 युगादिकृत - युगादिका का प्रारंभ करने वाला, 301 युगावर्त - चारों युगों को चक्र के समान घुमाने वाला, 302 नैकमय - अनेक मोहों को धारण करने वाला, 303 महाशन - कल्प के अंत में सबको ग्रस लेने वाला, 304 अदृश्य - समस्त इन्द्रियों के अधीन, 305 अव्यक्तरूप - निराकार रूप वाला, 306 सहस्रजित - युद्ध में हजारों की संख्या वाला, देवताओं के शत्रुओं को जीतने वाला, 307 अनंतजित - युद्ध और क्रीड़ा आदि में सर्वत्र समस्त भूतों को जीतने वाला ॥46॥
300 Yugadikrit - One who starts Yugadika, 301 Yugavarta: - One who rotates the four yugas like a wheel, 302 Naikmay: - One who embraces many illusions, 303 Mahashan: - One who consumes everyone at the end of the Kalpa, 304 Invisible: - Subject to all sense organs, 305 Avyaktarup: - One who has formless form, 306 Sahasrajit - Thousands in war. The one who conquers the enemies of Gods, 307 Anantjit - the one who conquers all the ghosts everywhere in war and sports etc. 46॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥