Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.170.44: 283 अमृतांशुद्भव:- समुद्र मंथन के समय चंद्रमा को उत्पन्न करने वाले, 284 भानु:- अनुभव करने वाले, 285 शशबिन्दु:- खरगोश के समान चिह्न वाले चंद्रमा के स्वरूप, 286 सुरेश्वर:- देवताओं के भी देव, 287 औषधम् - संसार के रोगों को दूर करने वाली औषधि के स्वरूप, 288 जगत: सेतु:- संसार सागर से पार जाने के लिए पुल के स्वरूप, 289 सत्यधर्मपराक्रम:- जो सत्य, धर्म और पराक्रम के स्वरूप हैं । 44॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.170.44 
अमृतांशूद्भवो भानु: शशबिन्दु: सुरेश्वर:।
औषधं जगत: सेतु: सत्यधर्मपराक्रम:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
283 अमृतांशुद्भव:- समुद्र मंथन के समय चंद्रमा को उत्पन्न करने वाले, 284 भानु:- अनुभव करने वाले, 285 शशबिन्दु:- खरगोश के समान चिह्न वाले चंद्रमा के स्वरूप, 286 सुरेश्वर:- देवताओं के भी देव, 287 औषधम् - संसार के रोगों को दूर करने वाली औषधि के स्वरूप, 288 जगत: सेतु:- संसार सागर से पार जाने के लिए पुल के स्वरूप, 289 सत्यधर्मपराक्रम:- जो सत्य, धर्म और पराक्रम के स्वरूप हैं । 44॥
 
283 Amritanshudbhav: - the one who produces the moon during the churning of the ocean, 284 Bhanu: - the one who feels, 285 Shashbindu: - the form of the moon with a sign like a rabbit, 286 Sureshwar: - the God of gods, 287 Aushadam - the form of medicine to cure the diseases of the world, 288 Jagat: Setu: - the form of a bridge to cross the worldly ocean, 289 Satyadharmaparakrama: -Those who are the embodiment of truth, religion and bravery. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)