श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.170.37 
अग्रणीर्ग्रामणी: श्रीमान् न्यायो नेता समीरण:।
सहस्रमूर्धा विश्वात्मा सहस्राक्ष: सहस्रपात्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
218 प्रज्ञान: - मुमुक्षुओं को उत्तम पद पर ले जाने वाले, 219 ग्रामणी: - भूत समुदाय के नेता, 220 श्रीमान्: - सर्वोच्च तेज वाले, 221 न्याय: - तर्क के मूर्त रूप, प्रमाणों के आश्रय वाले, 222 नेता - जगत् रूपी यंत्र को चलाने वाले, 223 समीरन: - प्राण रूपी जीवों को प्रयत्नशील बनाने वाले, 224 सहस्रमूर्धा: - हजार सिरों वाले, 225 विश्वात्मा - जगत की आत्मा, 226 सहस्राक्ष - हजार नेत्रों वाले, 227 सहस्रपात - हजार पैरों वाले । 37॥
 
218 Pragyaan: -one who takes the Mumukshus to the best position, 219 Gramani: -leader of the ghost community, 220 Sriman: -one with the highest radiance, 221 Nyaya: -the embodiment of logic, sheltered by proofs, 222 leader -one who operates the world-form machine, 223 Samiran: -one who makes the living beings strive in the form of breath, 224 Sahasramurdha. -Having a thousand heads, 225 Vishwatma -Soul of the world, 226 Sahasraksha -Having a thousand eyes, 227 Sahasrapat -Having a thousand legs. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)