श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.170.36 
गुरुर्गुरुतमो धाम सत्य: सत्यपराक्रम:।
निमिषोऽनिमिष: स्रग्वी वाचस्पतिरुदारधी:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
209 गुरु:- समस्त विद्याओं का उपदेश करने वाले, 210 गुरुतम:- ब्रह्मा आदि को ब्रह्मविद्या प्रदान करने वाले, 211 धाम:- सम्पूर्ण जगत् का आश्रय, 212 सत्य:- जो सत्यस्वरूप हैं, 213 सत्यपराक्रम:- जिनमें अमोघ पराक्रम है, 214 निमिष:- योगनिद्रा के कारण जिनकी आँखें बंद हैं, 215 अनिमिष:- जो मत्स्य रूप में अवतरित होते हैं, 216 सृग्वि:- वैजयंती माला धारण करने वाले, 217 वाचस्पतिरुदर्धि:- समस्त वस्तुओं को प्रकट करने वाली बुद्धि से युक्त समस्त विद्याओं के पति । 36॥
 
209 Guru: - One who preaches all the knowledge, 210 Gurutam: - One who imparts Brahmavidya to Brahma etc., 211 Dham - Shelter of the entire world, 212 Satya: - One who is the embodiment of truth, 213 Satyaparakrama: - One who has infallible valor, 214 Nimish: - One who has eyes closed due to Yoga Nidra, 215 Animish: - One who incarnates in the form of a fish, 216 Srgvi - the one who wears Vaijayanti Mala, 217 Vachaspatirudardhi: - the husband of all the knowledge with the intelligence that reveals all the things. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)