95 अज: - जन्मरहित, 96 सर्वेश्वर: - सब देवताओं के भी परमेश्वर, 97 सिद्ध: - नित्यसिद्ध, 98 सिद्धि: - सबका परिणाम, 99 सर्वादि: - समस्त भूतों का मूल कारण, 100 अच्युत: - जो तीन काल में भी अपने स्वरूप-अवस्था से कभी नहीं गिरते, 101 वृषाकपि: - धर्म और वराहरूप, 102 अमेयात्मा - अप्रतिम रूप, 103 सर्वयोगविनिःस्तृ - जो नाना प्रकार के शास्त्रों के द्वारा जान लिए जाते हैं । 24॥
95 Aja: -Birthless, 96 Sarveshwar: -God of all Gods, 97 Siddha: -Nityasiddh, 98 Siddhi: -The result of all, 99 Sarvaadi: -The original cause of all existences, 100 Achyut: -The one who never falls from his form-state even in three times, 101 Vrishakapi: -Dharma and Varaharupa, 102 Ameyatma -Imparable form, 103 सर्वयोगविनिःस्तृ - Those who come to know through various types of scriptures. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥