श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.170.24 
अज: सर्वेश्वर: सिद्ध: सिद्धि: सर्वादिरच्युत:।
वृषाकपिरमेयात्मा सर्वयोगविनि:सृत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
95 अज: - जन्मरहित, 96 सर्वेश्वर: - सब देवताओं के भी परमेश्वर, 97 सिद्ध: - नित्यसिद्ध, 98 सिद्धि: - सबका परिणाम, 99 सर्वादि: - समस्त भूतों का मूल कारण, 100 अच्युत: - जो तीन काल में भी अपने स्वरूप-अवस्था से कभी नहीं गिरते, 101 वृषाकपि: - धर्म और वराहरूप, 102 अमेयात्मा - अप्रतिम रूप, 103 सर्वयोगविनिःस्तृ - जो नाना प्रकार के शास्त्रों के द्वारा जान लिए जाते हैं । 24॥
 
95 Aja: -Birthless, 96 Sarveshwar: -God of all Gods, 97 Siddha: -Nityasiddh, 98 Siddhi: -The result of all, 99 Sarvaadi: -The original cause of all existences, 100 Achyut: -The one who never falls from his form-state even in three times, 101 Vrishakapi: -Dharma and Varaharupa, 102 Ameyatma -Imparable form, 103 सर्वयोगविनिःस्तृ - Those who come to know through various types of scriptures. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)