श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.170.2 
युधिष्ठिर उवाच
किमेकं दैवतं लोके किं वाप्येकं परायणम्।
स्तुवन्त: कं कमर्चन्त: प्राप्नुयुर्मानवा: शुभम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "पितामह! इस सम्पूर्ण जगत् में एक ईश्वर कौन है और इस जगत् में एक परम आश्रय कौन है? किस ईश्वर की स्तुति और स्तुति करने से तथा बाह्य और आन्तरिक रूप से नाना प्रकार से किस ईश्वर की पूजा करने से मनुष्य कल्याण प्राप्त कर सकता है?"॥2॥
 
Yudhishthira said, "Grandpa! Who is the one God in the whole world and who is the one ultimate refuge in this world? By praising and singing the praises of which God and by worshipping which God in various ways, externally and internally, can human beings achieve welfare?"॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)