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mahabharat 13.170.142: जो लोग जगत के रचयिता, पालन और संहार करने वाले, जगत के ईश्वर, जन्मरहित कमलनेत्र भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे कभी पराजित नहीं होते॥142॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.170.142 
विश्वेश्वरमजं देवं जगत: प्रभवाप्ययम्।
भजन्ति ये पुष्कराक्षं न ते यान्ति पराभवम्॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
जो लोग जगत के रचयिता, पालन और संहार करने वाले, जगत के ईश्वर, जन्मरहित कमलनेत्र भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे कभी पराजित नहीं होते॥142॥
 
Those who worship the birthless lotus-eyed Lord Vishnu, the God of the world, who creates, maintains and destroys the world, are never defeated. 142॥
 
इति श्रीमहाभारते शतसाहस्रॺां संहितायां वैयासिक्यामनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विष्णुसहस्रनामकथने एकोनपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत व्यासनिर्मित शतसाहस्रीय संहितासम्बन्धी अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विष्णुसहस्रनामकथनविषयक एक सौ उनचासवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल १४४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)