Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.170.14: ॐ सच्चिदानन्दस्वरूप, 1 विश्वम् - विराटस्वरूप, 2 विष्णु: - सर्वव्यापी, 3 वषट्कर: - जिस उद्देश्य से यज्ञ में वषट क्रिया की जाती है, ऐसा यज्ञस्वरूप, 4 भूतभाव्यभवत्प्रभु: - भूत, भविष्य और वर्तमान का स्वामी, 5 भूतकृत - रजोगुण को ग्रहण करके ब्रह्मस्वरूप से सम्पूर्ण प्राणियों की रचना करने वाले, 6 भूतभृत - सत्त्वगुण को ग्रहण करके सम्पूर्ण। भूतों का पालन-पोषण करने वाले, 7 भव: - जो अनन्त स्वरूप में होते हुए भी स्वतः उत्पन्न होते हैं, 8 भूतात्मा - सम्पूर्ण भूतों की आत्मा, 9 भूतभवन: - भूतों की रचना और वृद्धि करने वाले। 14॥ | mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ॐ सच्चिदानन्दस्वरूप, 1 विश्वम् - विराटस्वरूप, 2 विष्णु: - सर्वव्यापी, 3 वषट्कर: - जिस उद्देश्य से यज्ञ में वषट क्रिया की जाती है, ऐसा यज्ञस्वरूप, 4 भूतभाव्यभवत्प्रभु: - भूत, भविष्य और वर्तमान का स्वामी, 5 भूतकृत - रजोगुण को ग्रहण करके ब्रह्मस्वरूप से सम्पूर्ण प्राणियों की रचना करने वाले, 6 भूतभृत - सत्त्वगुण को ग्रहण करके सम्पूर्ण। भूतों का पालन-पोषण करने वाले, 7 भव: - जो अनन्त स्वरूप में होते हुए भी स्वतः उत्पन्न होते हैं, 8 भूतात्मा - सम्पूर्ण भूतों की आत्मा, 9 भूतभवन: - भूतों की रचना और वृद्धि करने वाले। 14॥
Om Sachchidanandswaroop, 1 Vishwam - Viratswaroop, 2 Vishnu: - Omnipresent, 3 Vashatkar: - For the purpose of which Vashat Kriya is performed in Yagya, such Yagya Swarup, 4 Bhootabhavyabhavatprabhu: - Lord of the past, future and present, 5 Bhootkrit - One who creates all the beings from the form of Brahma by accepting the Rajogun, 6 Bhootbhrit - Complete by accepting the Sattvagun. Those who nurture the ghosts, 7 Bhav: - The ones who are born automatically despite being in eternal form, 8 Bhootatma - The soul of all the ghosts, 9 Bhoot Bhavan: - The one who creates and increases the ghosts. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥