श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  13.170.137 
सर्वागमानामाचार: प्रथमं परिकल्पते।
आचारप्रभवो धर्मो धर्मस्य प्रभुरच्युत:॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
समस्त शास्त्रों में आचरण को प्रथम माना गया है, आचरण से ही धर्म की उत्पत्ति होती है और धर्म का स्वामी भगवान् हैं, जो अच्युत हैं ॥137॥
 
In all the scriptures, conduct is considered first, religion originates from conduct and the master of religion is God, who is infallible. 137॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)