श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  13.170.136 
इन्द्रियाणि मनो बुद्धि: सत्त्वं तेजो बलं धृति:।
वासुदेवात्मकान्याहु: क्षेत्रं क्षेत्रज्ञ एव च॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
वेद कहते हैं कि इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, सत्व, तेज, बल, सहनशीलता, क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (आत्मा) ये सब श्री वासुदेव के ही स्वरूप हैं ॥136॥
 
The Vedas say that the senses, mind, intellect, sattva, sharpness, strength, endurance, kshetra (body) and kshetragya (soul) are all forms of Shri Vasudeva. 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)