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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्
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श्लोक 132
श्लोक
13.170.132
इमं स्तवमधीयान: श्रद्धाभक्तिसमन्वित:।
युज्येतात्मसुखक्षान्तिश्रीधृतिस्मृतिकीर्तिभि:॥ १३२॥
अनुवाद
जो मनुष्य श्रद्धा और भक्तिपूर्वक इस विष्णुसहस्रनाम का पाठ करता है, वह आत्मसुख, क्षमा, लक्ष्मी, धैर्य, स्मृति और यश प्राप्त करता है ॥132॥
The man who recites this Vishnusahasranama with devotion and devotion, attains self-pleasure, forgiveness, Lakshmi, patience, memory and fame. 132॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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