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mahabharat 13.170.130: जो मनुष्य वासुदेव पर आश्रित होकर उनके प्रति समर्पित रहता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और शुद्ध हृदय से सनातन परब्रह्म को प्राप्त करता है ॥130॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.170.130 
वासुदेवाश्रयो मर्त्यो वासुदेवपरायण:।
सर्वपापविशुद्धात्मा याति ब्रह्म सनातनम्॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य वासुदेव पर आश्रित होकर उनके प्रति समर्पित रहता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और शुद्ध हृदय से सनातन परब्रह्म को प्राप्त करता है ॥130॥
 
The person who is dependent on Vasudeva and devoted to him, becomes free from all sins and with a pure heart attains the eternal Supreme Being. ॥130॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)