श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  13.170.128 
रोगार्तो मुच्यते रोगाद् बद्धो मुच्येत बन्धनात् ।
भयान्मुच्येत भीतस्तु मुच्येतापन्न आपद:॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
रोग से पीड़ित मनुष्य रोग से मुक्त हो जाता है, बंधन में पड़ा हुआ मनुष्य बंधन से मुक्त हो जाता है, भयभीत मनुष्य भय से मुक्त हो जाता है और संकट में पड़ा हुआ मनुष्य संकट से मुक्त हो जाता है ॥128॥
 
A man suffering from illness gets free from his illness, a man in bondage gets free from bondage, a frightened person gets free from fear and a person in trouble gets free from trouble. ॥128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)