श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  13.170.122 
य इदं शृणुयान्नित्यं यश्चापि परिकीर्तयेत्।
नाशुभं प्राप्नुयात् किंचित् सोऽमुत्रेह च मानव:॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस विष्णुसहस्रनाम को सदैव सुनता है और जो नित्य इसका जप या पाठ करता है, उसके लिए इस लोक में या परलोक में कोई अनिष्ट नहीं होता ॥122॥
 
A person who always listens to this Vishnu Sahasranama and who daily chants or recites it, nothing bad happens to him either in this world or the next. ॥122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)