श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  13.170.113 
अनन्तरूपोऽनन्तश्रीर्जितमन्युर्भयापह: ।
चतुरस्रो गभीरात्मा विदिशो व्यादिशो दिश:॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
932 अनन्तरूप:- अमरत्वस्वरूप। व्यादिश:- जो सब को उनकी उपयुक्तता के अनुसार नाना प्रकार के उपदेश देता है। 940 दिश:- जो वेदरूप में समस्त कर्मों का फल बताता है। 113॥
 
932 Anantroop: - One who has the form of immortality. व्यादिष: -One who gives various instructions to everyone as per their suitability, 940 Dish: -One who tells the results of all the deeds in the form of Vedas. 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)