Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.170.111: 915 अक्रूर: - सब प्रकार के क्रूर भावों से रहित, 916 पेशल: - मन, वाणी और कर्म से - सब प्रकार से सुन्दर होने के कारण अत्यंत सुंदर, 917 दक्ष: - सब प्रकार से संपन्न, अत्यंत बलवान और बड़े से बड़े कार्य को भी क्षण भर में करने वाले, 918 दक्षिण: - संहारक, 919 क्षीमिनं वर: - क्षमा करने वालों में श्रेष्ठ, 920 विद्वत्तम: - विद्वानों में श्रेष्ठ विद्वान, 921 वीतभय: - सब प्रकार के भय से मुक्त, 922 पुण्यश्रवणकीर्तन: - जिनके नाम, गुण, महिमा और रूप का श्रवण और कीर्तन परम पवित्र हैं; इस प्रकार । 111॥ | mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
915 अक्रूर: - सब प्रकार के क्रूर भावों से रहित, 916 पेशल: - मन, वाणी और कर्म से - सब प्रकार से सुन्दर होने के कारण अत्यंत सुंदर, 917 दक्ष: - सब प्रकार से संपन्न, अत्यंत बलवान और बड़े से बड़े कार्य को भी क्षण भर में करने वाले, 918 दक्षिण: - संहारक, 919 क्षीमिनं वर: - क्षमा करने वालों में श्रेष्ठ, 920 विद्वत्तम: - विद्वानों में श्रेष्ठ विद्वान, 921 वीतभय: - सब प्रकार के भय से मुक्त, 922 पुण्यश्रवणकीर्तन: - जिनके नाम, गुण, महिमा और रूप का श्रवण और कीर्तन परम पवित्र हैं; इस प्रकार । 111॥
915 Akrura: -Free from all kinds of cruel feelings, 916 Peshal: -mind, speech and actions - extremely beautiful because of being beautiful in all respects, 917 Daksha: -prosperous in every way, extremely powerful and very efficient who can do even the biggest tasks in a moment, 918 Dakshin: -destroyer, 919 Kshiminam Var: -best among the forgiving, 920 Vidvattam: -The supreme scholar among the best of scholars, 921 Veetbhaya: -Free from all kinds of fear, 922 Punyashravankirtan: -The hearing and kirtan of whose name, qualities, glory and form are most sacred; This way. 111॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥