श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.17.73 
अन्तर्हिते भगवति सानुगे यादवेश्वर।
ऋषिराश्रममागम्य ममैतत् प्रोक्तवानिह॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
यादवेश्वर! जब भगवान् अपने गणों सहित अन्तर्धान हो गये, तब मुनि ने मेरे आश्रम में आकर मुझसे ये सब बातें कहीं।
 
Yadaveshwar! When the Lord along with his associates disappeared, the sage came to my hermitage and told me all these things. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)