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इति तण्डिस्तपोराशिस्तुष्टावेशानमात्मना।
जगौ च परमं ब्रह्म यत् पुरा लोककृज्जगौ॥ ६६॥
अनुवाद
इस प्रकार तपस्वियों के धनी तण्डि ने मन ही मन भगवान महादेव की स्तुति की तथा वही परम पुरुषोत्तम स्तोत्र गाया जो पूर्वकाल में भगवान ब्रह्मा ने गाया था।
In this manner Tandi, who was a treasure trove of austerities, praised Lord Mahadev in his mind and sang the same hymn dedicated to the Supreme Being that Lord Brahma had sung in the past.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥