श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  13.17.65 
वेदशास्त्रपुराणोक्ता: पञ्चैता गतय: स्मृता:।
त्वत्प्रसादाद्धि लभ्यन्ते न लभ्यन्तेऽन्यथा विभो॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वेद, शास्त्र और पुराणों में वर्णित ये पाँच गतियाँ आपकी कृपा से ही प्राप्त हो सकती हैं, अन्यथा नहीं॥65॥
 
Lord! These five stages of life which are mentioned in the Vedas, scriptures and Puranas can be achieved only by your grace and not otherwise. ॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)