Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.17.38: हृदय मंदिर में गुप्त रहने वाले और अप्रकाशित रहने वाले इस परमेश्वर ने अपनी माया से सबको मोहित कर रखा है। इसीलिए देवता, दानव और मनुष्य महादेव को यथार्थ रूप से नहीं जान पाते हैं। 38॥ | mahabharat अध्याय 13.17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं त्वां देवासुरनरास्तत्त्वेन न विदुर्भवम्।
मोहिता: खल्वनेनैव हृदिस्थेनाप्रकाशिना॥ ३८॥
अनुवाद
हृदय मंदिर में गुप्त रहने वाले और अप्रकाशित रहने वाले इस परमेश्वर ने अपनी माया से सबको मोहित कर रखा है। इसीलिए देवता, दानव और मनुष्य महादेव को यथार्थ रूप से नहीं जान पाते हैं। 38॥
This Supreme God, who remains mysterious in the temple of the heart and does not get published, has captivated everyone with His illusion. That is why gods, demons and humans are not able to truly know Mahadev. 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥