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श्री महाभारत
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अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल
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श्लोक 35
श्लोक
13.17.35
अत: प्रवर्तते सर्वमस्मिन् सर्वं प्रतिष्ठितम्।
अस्मिंश्च प्रलयं याति अयमेक: सनातन:॥ ३५॥
अनुवाद
उसी से सब कुछ उत्पन्न होता है, उसी में सम्पूर्ण जगत् स्थित है और उसी में सब कुछ लय हो जाता है। वही एक सनातन सत्ता है॥ 35॥
It is from Him that everything is born, in Him the whole universe is established and in Him everything dissolves. He is the one eternal being.॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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