Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.17.34: मोक्ष चाहने वालों के लिए परम गति केवल यही भगवान हैं। देवताओं सहित समस्त लोकों की रचना करके ये महादेव स्वयं अपने आठ रूपों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा, यजमान) द्वारा उनका पालन-पोषण करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मोक्ष चाहने वालों के लिए परम गति केवल यही भगवान हैं। देवताओं सहित समस्त लोकों की रचना करके ये महादेव स्वयं अपने आठ रूपों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा, यजमान) द्वारा उनका पालन-पोषण करते हैं।
The ultimate destination for those who desire salvation is only this God. After creating all the worlds including the gods, this Mahadeva himself sustains and nourishes them through his eight forms (earth, water, air, fire, sky, sun, moon, host).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥