श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.17.21 
त्वं वै स्वर्गश्च मोक्षश्च काम: क्रोधस्त्वमेव च।
सत्त्वं रजस्तमश्चैव अधश्चोर्ध्वं त्वमेव हि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
आप ही स्वर्ग और मोक्ष हैं। आप ही काम और क्रोध हैं, तथा आप ही सत्व, रजोगुण, अंधकार, अधोलोक और ऊर्ध्वलोक हैं। ॥21॥
 
You are heaven and salvation. You are desire and anger, and you are the goodness, passions, darkness, the lower world and the upper world. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)