Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.17.14-15h: हे प्रभु! आप उन साधुओं को निर्वाण (मोक्ष) प्रदान करने वाले हैं जो जन्म-मृत्यु से भयभीत रहते हैं और संसार के बंधनों से मुक्त होने का प्रयास करते हैं। आप सहस्र किरणों वाले सूर्य के समान प्रकाशित होने वाले हैं। हे सुख के आश्रय स्वरूप महेश्वर! आपको नमस्कार है। 14 1/2।   |   mahabharat अध्याय 13.17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  13.17.14-15h 
जातीमरणभीरूणां यतीनां यततां विभो॥ १४॥
निर्वाणद सहस्रांशो नमस्तेऽस्तु सुखाश्रय।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आप उन साधुओं को निर्वाण (मोक्ष) प्रदान करने वाले हैं जो जन्म-मृत्यु से भयभीत रहते हैं और संसार के बंधनों से मुक्त होने का प्रयास करते हैं। आप सहस्र किरणों वाले सूर्य के समान प्रकाशित होने वाले हैं। हे सुख के आश्रय स्वरूप महेश्वर! आपको नमस्कार है। 14 1/2।
 
O Lord! You are the one who grants nirvana (salvation) to those saints who are afraid of birth and death and try to be free from the bondage of the world. You are the one who shines like a sun with thousands of rays. O Maheshwar, who is the shelter of happiness! Salutations to you. 14 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)