श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  13.17.13-14h 
विश्वावसुहिरण्याक्षपुरुहूतनमस्कृत॥ १३॥
भूरिकल्याणद विभो परं सत्यं नमोऽस्तु ते।
 
 
अनुवाद
गंधर्वराज विश्वावसु, दैत्यराज हिरण्याक्ष और देवराज इंद्र भी आपकी पूजा करते हैं। हे सबका कल्याण करने वाले प्रभु! आप ही परम सत्य हैं। आपको नमस्कार है॥13 1/2॥
 
Gandharvaraj Vishwavasu, demon king Hiranyaksh and Devraj Indra also worship you. O Lord who bestows great welfare to everyone! You are the ultimate truth. Salutations to you.॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)