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श्लोक 13.169.66  |
युधिष्ठिरस्तु गाङ्गेयं विश्रान्तं भूरिदक्षिणम्।
पुनरेव महाबुद्धि: पर्यपृच्छन्महीपति:॥ ६६॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् जब महान दान देने वाले गंगापुत्र भीष्म विश्राम कर चुके, तब बुद्धिमान राजा युधिष्ठिर ने पुनः प्रश्न पूछना आरम्भ किया। |
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| Thereafter, when Ganga's son Bhishma, who gave large donations, had rested, the wise King Yudhishthira again began asking questions. |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि महापुरुष प्रस्तावे अष्टचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें महापुरुष श्रीकृष्णकी प्रशंसाविषयक एक सौ अड़तालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४८॥
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