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mahabharat 13.169.62: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! महापुरुष गंगापुत्र भीष्म के मुख से यह सुनकर, उन महामनस्वी पुरुषों के बीच बैठे हुए कुरुपुत्र युधिष्ठिर चुप हो गए।   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.169.62 
वैशम्पायन उवाच
एवं सम्भाषमाणे तु गाङ्गेये पुरुषर्षभे।
तूष्णीं बभूव कौरव्यो मध्ये तेषां महात्मनाम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! महापुरुष गंगापुत्र भीष्म के मुख से यह सुनकर, उन महामनस्वी पुरुषों के बीच बैठे हुए कुरुपुत्र युधिष्ठिर चुप हो गए।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Upon hearing this from the great man, son of Ganga, Bhishma, Yudhishthira, the son of the Kuru clan, sitting amidst those great-minded men, became quiet. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)