श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  13.169.57 
बाल एव महाबाहुश्चकार कदनं महत्।
कंसस्य पुण्डरीकाक्षो ज्ञातित्राणार्थकारणात्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु, कमलनेत्र वाले श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल में ही अपने स्वजनों की रक्षा के लिए कंस का बहुत बड़ा संहार कर दिया था ॥57॥
 
In his childhood itself, the mighty-armed, lotus-eyed Sri Krishna had killed Kansa to a great extent to protect his relatives. ॥ 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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